खुसरोबाग में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतापगढ़ के 65 पान उत्पादक किसानों ने लिया हिस्सा
प्रयागराज। प्रदेश में गुणवत्तायुक्त पान उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरोबाग, प्रयागराज में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में प्रतापगढ़ जनपद के 65 पान उत्पादक किसानों ने भाग लेकर आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पान की फसल में लगने वाले रोगों एवं कीटों के जैविक नियंत्रण, उन्नत उत्पादन तकनीकों तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी देना रहा।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए नेशनल सेल मैनेजर, एकोसेफ लिमिटेड के डॉ. अशोक सिंह ने किसानों को पान की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों की पहचान और उनके प्रभावी नियंत्रण के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि रासायनिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से बचते हुए किसानों को जैविक फफूंदनाशकों एवं जैविक विधियों को अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मृदा जनित रोगों की रोकथाम के लिए बोर्डो मिश्रण का प्रयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है, जिससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
प्रसार निदेशालय, शुआट्स नैनी, प्रयागराज के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने पान की बरेजा में कुंदरू और परवल जैसी सहफसली खेती को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सहफसली खेती अपनाने से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी और भूमि का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।
कीट विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनुराग तायडे ने पान की फसल में लगने वाले कीटों के वैज्ञानिक एवं जैविक प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को प्रकाश प्रपंच, फेरोमोन ट्रैप तथा अन्य जैविक उपायों के उपयोग के बारे में बताया और कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के विशेषज्ञ विवेक श्रीवास्तव ने किसानों को उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा 1500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पान बरेजा निर्माण के लिए 75,680 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने जनपद के जिला उद्यान अधिकारी से संपर्क कर ऑनलाइन पंजीकरण कराएं और इस योजना का लाभ उठाएं।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्रभारी वी.के. सिंह एवं तकनीकी सहयोगी मनीष कुमार ने भी किसानों को पान उत्पादन की आधुनिक तकनीकों, फसल प्रबंधन और गुणवत्तायुक्त उत्पादन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। वहीं प्रतापगढ़ के प्रगतिशील पान उत्पादक सुरेश कुमार चौरसिया, प्रदीप चौरसिया, राजेंद्र चौरसिया, लालमन चौरसिया, जगदीश प्रसाद, उमा देवी एवं धरमशिला सहित अन्य किसानों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए, जिससे प्रतिभागियों को खेती से जुड़े उपयोगी सुझाव प्राप्त हुए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी कराया। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि जैविक तकनीकों एवं वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर किसान पान की बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। कार्यक्रम का समापन किसानों को उन्नत एवं टिकाऊ खेती अपनाने का संकल्प दिलाते हुए किया गया।
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