प्रयागराज में दिव्यांगजनों के लिए मोबाइल कोर्ट का आयोजन, 131 मामलों की सुनवाई; अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश

प्रयागराज, 15 जुलाई। दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से बुधवार को प्रयागराज के सर्किट हाउस सभागार में राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन उत्तर प्रदेश प्रो. हिमांशु शेखर झा की अध्यक्षता में मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की भावना के अनुरूप आयोजित इस विशेष शिविर में कुल 131 शिकायतों और प्रार्थना-पत्रों की सुनवाई की गई तथा संबंधित अधिकारियों को सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

मोबाइल कोर्ट का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के प्रति जागरूक करना, समाज में उनके साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करना तथा स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराना रहा। सुनवाई के दौरान दिव्यांग प्रमाण-पत्र (यूडीआईडी), राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, आवास, दिव्यांग पेंशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मामलों पर विस्तार से विचार किया गया।

राज्य आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्र से संबंधित लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इसके लिए मेडिकल बोर्ड की बैठक सप्ताह में तीन दिन आयोजित कर अधिक से अधिक दिव्यांग प्रमाण-पत्र जारी किए जाएं। उन्होंने तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत मेडिकल बोर्ड के सदस्यों को हटाकर 7 से 8 विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल करते हुए बोर्ड का पुनर्गठन करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार के 12 मार्च 2024 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांगजनों को अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी दिव्यांग प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। साथ ही श्रवण बाधित दिव्यांगजनों के लिए आवश्यक परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु इम्पैनल्ड अस्पतालों से प्रस्ताव प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

राज्य आयुक्त ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि दिव्यांगजनों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई के लिए अलग से समय-सारिणी निर्धारित करें, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग का कार्यालय ऊपरी मंजिल पर संचालित हो रहा है तो दिव्यांगजनों की सुविधा को देखते हुए यथासंभव भूतल पर कक्ष आवंटित कर उनकी समस्याओं की सुनवाई की जाए। इसके अलावा खेल, साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले दिव्यांग व्यक्तियों को दिव्यांग आइकन के रूप में प्रोत्साहित करने की भी बात कही।

मोबाइल कोर्ट के दौरान पात्र दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों का वितरण भी किया गया। राज्य आयुक्त ने 25 श्रवण यंत्र, 10 एमआर किट, 3 व्हीलचेयर और 1 स्मार्ट केन वितरित की। उन्होंने कहा कि ये उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा सरकार उनके कल्याण और सशक्तीकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम के दौरान मौके पर ही 25 दिव्यांगजनों को दिव्यांग प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड तथा 5 पात्र लाभार्थियों को अंत्योदय राशन कार्ड भी उपलब्ध कराए गए। वहीं पात्र दिव्यांगजनों को आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास विभाग को निर्देशित किया गया कि आवेदनों का शीघ्र सत्यापन कर प्राथमिकता के आधार पर आवास स्वीकृत किए जाएं।

मोबाइल कोर्ट में उपस्थित दिव्यांगजनों ने अपनी समस्याएं सीधे राज्य आयुक्त के समक्ष रखीं, जिन पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम में अपर नगर मजिस्ट्रेट तृतीय, उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग प्रयागराज मंडल, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास विभाग, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, विद्युत एवं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, लीड बैंक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, मंडल रेल प्रबंधक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। मोबाइल कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराते हुए उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।