मेजा (प्रयागराज)। मेजा तहसील के दोनों विकासखंडों में अवैध और कथित फर्जी क्लीनिकों के संचालन का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मान्यता और बिना चिकित्सकीय डिग्री के कई लोग स्वयं को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्षेत्र के अखरी शाहपुर में संचालित एक कथित बंगाली डॉक्टर के क्लीनिक पर जब जानकारी ली गई तो उसने स्वीकार किया कि वह केवल कक्षा 10 तक पढ़ा है। पूछने पर उसने बताया कि किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के बजाय उसने कई वर्षों तक प्रैक्टिस कर इलाज करना सीखा और पिछले लगभग 10 वर्षों से क्लीनिक संचालित कर रहा है। उसने यह भी दावा किया कि "सीएमओ प्रयागराज ने कहा है कि बड़ा इलाज मत करना, छोटा इलाज कर सकते हो।" हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि मेजा क्षेत्र में ऐसे कई कथित फर्जी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जहां बिना पंजीकरण और बिना आवश्यक मानकों के मरीजों का उपचार किया जाता है। गंभीर बीमारी होने पर भी मरीजों को प्राथमिक उपचार के नाम पर दवाइयां देकर इलाज किया जाता है, जिससे कई बार उनकी हालत और बिगड़ जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब किसी मरीज की हालत गंभीर हो जाती है या कोई विवाद उत्पन्न होता है, तब ऐसे क्लीनिक संचालक अपना क्लीनिक बंद कर फरार हो जाते हैं। इसके बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मेजा क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सभी निजी क्लीनिकों की जांच कराई जाए। जिन क्लीनिकों के पास वैध पंजीकरण, चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक अनुमति नहीं है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और मानक के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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