प्रयागराज, 16 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में गुरुवार को प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह भव्य एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और पहलें की गईं। इस अवसर पर कुल 81,882 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 42,960 छात्राएं और 38,922 छात्र शामिल रहे।
शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 236 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 242 पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 73 स्वर्ण, 82 रजत और 87 कांस्य पदक प्रदान किए गए। पदक प्राप्त करने वालों में 158 छात्राएं और 78 छात्र शामिल रहे, जो उच्च शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। राज्यपाल ने छात्राओं की इस उपलब्धि की विशेष सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तीकरण का मजबूत उदाहरण बताया।
दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय की तीन नई शैक्षणिक सुविधाओं—अकादमिक भवन-सी, लर्निंग रिसोर्स सेंटर (प्रथम तल) तथा समेकित सुविधा भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने समाजसेवी खत्री अब्दुल सत्तार बापू को समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान की। विश्वविद्यालय की वार्षिक स्मारिका एवं विभिन्न प्रतिवेदनों का भी विमोचन किया गया।
समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चार शिक्षकों, राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले 14 खिलाड़ियों तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जबकि राजकीय बालिका गृह की छात्राओं ने अपनी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रयागराज एवं कौशांबी के लिए 500 आंगनबाड़ी स्वास्थ्य किट वितरित कीं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 66,143 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। साथ ही प्रयागराज और कौशांबी में 900 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया, जिसमें पुलिस कर्मियों की बेटियां भी शामिल रहीं। उन्होंने सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में व्यापक अभियान चलाकर पात्र बालिकाओं का शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को डिग्री की हार्ड कॉपी के बजाय डिजिलॉकर के माध्यम से ऑनलाइन डिग्री डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी को उच्च शिक्षा, विदेश में अध्ययन अथवा रोजगार के लिए तत्काल डिग्री की आवश्यकता हो तो उसे दीक्षांत समारोह की प्रतीक्षा न कराई जाए और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर तुरंत प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाए।
अपने विस्तृत संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को नई दिशा देने वाली परिवर्तनकारी नीति है, जिसका उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, अनुसंधान, सृजनात्मकता और उद्यमिता का विकास करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अब केवल शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए नेतृत्व तैयार करने वाले केंद्र बन चुके हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि जिस महान व्यक्तित्व प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित है, उनके जीवन और विचारों पर अध्ययन, शोध, संगोष्ठियां एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को राजभवन में सम्मानित करने की भी घोषणा की।
राज्यपाल ने कहा कि आज का भारत नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 350 स्टार्टअप थे, जबकि आज उनकी संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा को पहचानने, नवाचार को अपनाने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में खाली पड़े भवनों का उपयोग कौशल विकास कार्यक्रमों के संचालन के लिए करने का निर्देश देते हुए कहा कि जो विद्यार्थी किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं, उन्हें कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा जाए। साथ ही विद्यालयों में सुंदर हस्तलेखन के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं अलग पीरियड निर्धारित करने की भी सलाह दी।
समारोह के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा से जुड़कर आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रयागराज ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की भूमि है। उन्होंने मेडल एवं उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता एवं शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और आज प्रदेश के कई विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी पहचान बना रहे हैं।
राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को जीवन की नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सफलता का मार्ग चुनौतियों से होकर गुजरता है, लेकिन दृढ़ संकल्प और परिश्रम से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया के आदर्श विद्यार्थियों के जीवन में सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
समारोह के अंत में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण किया तथा परिसर की स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यवस्था और शैक्षणिक वातावरण की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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