वाराणसी। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सारनाथ को शामिल किए जाने पर बाबू जगत सिंह शोध समिति में हर्ष का वातावरण है। समिति के संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , गजेंद्र सिंह शेखावत केंद्रीय संस्कृत एवं पर्यटन मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि सारनाथ केवल वाराणसी या उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य प्रतीक है। यूनेस्को द्वारा प्राप्त यह वैश्विक सम्मान भारतीय सभ्यता और बौद्ध धरोहर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा इसके संरक्षण, शोध और सांस्कृतिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।
प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर देशवासियों, इतिहासकारों एवं शोधकर्ताओं से भारत के गुमनाम शहीद नायकों और नायिकाओं के जीवन, संघर्ष और बलिदान को ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर खोजकर समाज के सामने लाने का आह्वान करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबू जगत सिंह शोध समिति भी उसी प्रेरणा से काशी एवं पूर्वांचल के ऐसे वीर सपूतों के इतिहास के शोध, संकलन, संरक्षण और जन-जन तक पहुँचाने का कार्य निरंतर कर रही है। समिति का विश्वास है कि देश के विस्मृत बलिदानियों को उचित सम्मान दिलाना सच्ची राष्ट्रसेवा है।
इस अवसर पर बाबू जगत सिंह शोध समिति के सदस्यों ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे देश और काशी के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। हर्ष व्यक्त करने वालों में त्रिपुरारी शंकर (अधिवक्ता), अशोक आनंद, प्रो. राणा पीवीसी, प्रो. ध्रुव कुमार सिंह, अरविंद सिंह (अधिवक्ता), राजेंद्र कुमार दूबे, डॉ. मेजर अरविंद कुमार सिंह, विकास यादव तथा शमीम अहमद प्रमुख रूप से शामिल रहे।
समिति ने आशा व्यक्त की कि सारनाथ को मिले इस वैश्विक सम्मान से न केवल इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि काशी और पूर्वांचल के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों एवं ऐतिहासिक विभूतियों पर शोध को भी नई दिशा प्राप्त होगी।यह संस्करण समाचार को सारनाथ की उपलब्धि और बाबू जगत सिंह शोध समिति के उद्देश्य—गुमनाम शहीदों और ऐतिहासिक नायकों के शोध—से स्वाभाविक रूप से जोड़ता है।
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