वाराणसी। हिंदी साहित्य के प्रखर, निर्भीक और जनपक्षधर कवि स्वर्गीय सुदामा पांडेय 'धूमिल' की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना ने पूरे वाराणसी ही नहीं, साहित्यिक जगत की संवेदनाओं को भी झकझोर दिया है। लोहता थाना क्षेत्र के विट्ठलपुर गांव स्थित 'काशी नाथ भीटा' के समीप स्थापित धूमिल की प्रतिमा के साथ हुई इस शर्मनाक हरकत को स्थानीय लोगों ने केवल एक प्रतिमा पर हमला नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक चेतना पर सीधा प्रहार बताया है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश, पीड़ा और तनाव का माहौल व्याप्त हो गया।


घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी और धूमिल के शुभचिंतक मौके पर पहुंच गए। क्षतिग्रस्त प्रतिमा को देखकर लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया। मौके पर जुटे लोगों ने कहा कि जिस कवि ने अपनी लेखनी से अन्याय, शोषण और व्यवस्था की विसंगतियों को बेबाक शब्द दिए, उसी महान साहित्यकार की प्रतिमा को निशाना बनाना समाज विरोधी मानसिकता का परिचायक है। लोगों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, कठोर कानूनी कार्रवाई और प्रतिमा के सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापन की मांग करते हुए चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


स्वर्गीय सुदामा पांडेय 'धूमिल' हिंदी कविता के उन विरले रचनाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी लेखनी सत्ता से सवाल करती रही और आम आदमी की पीड़ा को मुखर स्वर देती रही। उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसंवेदनाओं की सशक्त आवाज मानी जाती हैं। ऐसे में उनकी प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया जाना केवल एक मूर्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों और साहित्यिक विरासत का अपमान माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि 9 नवंबर 2025 को जिला पंचायत सदस्य सुनील सिंह के प्रयासों से विट्ठलपुर स्थित इस स्मृति द्वार तथा महाकवि धूमिल की प्रतिमा का भव्य अनावरण एवं स्थापना की गई थी। उस समय इसे गांव ही नहीं, पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का प्रतीक माना गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका था, लेकिन असामाजिक तत्वों ने अपनी ओछी हरकत से उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी तत्काल हरकत में आ गया। सूचना मिलते ही लोहता थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय तथा कोटवा चौकी प्रभारी गौरव सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है तथा उपलब्ध साक्ष्यों और संभावित सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अराजक तत्वों की पहचान के प्रयास तेज कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है तथा दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।

घटना के बाद ग्रामीणों और साहित्य प्रेमियों ने एक स्वर में कहा कि महाकवि धूमिल केवल विट्ठलपुर या वाराणसी की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य की अमूल्य विरासत हैं। उनकी प्रतिमा के साथ हुई यह शर्मनाक हरकत समाज के प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति की भावनाओं को आहत करने वाली है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई की जाए, जो भविष्य में किसी भी असामाजिक तत्व के लिए नजीर बने। साथ ही क्षतिग्रस्त प्रतिमा का शीघ्र और सम्मानजनक पुनर्स्थापन कर यह संदेश दिया जाए कि समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहर और साहित्यिक अस्मिता के सम्मान से कभी समझौता नहीं करेगा।