मेजा, प्रयागराज। मेजा विकासखंड अंतर्गत सिलौधी ग्राम सभा स्थित गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से संचालित इस गौशाला में निराश्रित गोवंशों के लिए निर्धारित सुविधाएं धरातल पर दिखाई नहीं दे रही हैं। उनका कहना है कि पशुओं के चारा-पानी और देखभाल में लापरवाही बरती जा रही है, जिससे गोवंशों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार सरकार द्वारा गौशालाओं में गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद सिलौधी गौशाला में व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पशुओं के लिए आने वाले चारा और अन्य संसाधनों में अनियमितता की आशंका है तथा कई बार चारा-पानी की कमी देखने को मिलती है।
गांव के अमित कुमार यादव, संतोष सिंह और रवि पटेल सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि गौशाला का कई बार उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं को देखकर संबंधित कर्मचारियों और ग्राम प्रधान को फटकार भी लगाई गई थी। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निरीक्षण के समय छोड़कर सामान्य दिनों में गौशाला की नियमित निगरानी नहीं होती। उनका कहना है कि मौके पर कुछ कर्मचारी काम करने के बजाय ताश खेलते दिखाई दिए। कुछ कर्मचारियों के नशे की हालत में होने का भी आरोप लगाया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर लापरवाही का मामला माना जाएगा।
इस संबंध में ग्राम प्रधान से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि वह अस्पताल में हैं तथा उनके अनुसार गौशाला में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग है और मौके पर जाकर निरीक्षण करने से अव्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांग की है कि सिलौधी गौशाला का निष्पक्ष एवं विस्तृत निरीक्षण कराया जाए। यदि चारा-पानी, पशुओं की देखभाल अथवा सरकारी धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गौवंशों की सुरक्षा और उचित देखभाल सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए संबंधित अधिकारियों को इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लेकर शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप शामिल हैं। संबंधित विभाग या कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।)
Comments (0)