चंदौली। विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर गुरुवार की शाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित सुभाष पार्क में भूतपूर्व सैनिकों एवं नगर के सम्मानित नागरिकों की ओर से कैंडल मार्च निकाला गया। कार्यक्रम का आयोजन भाजपा नेता एवं पूर्व सैनिक डॉ. कृष्णानन्द (केएन) पाण्डेय के नेतृत्व में किया गया। कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर भारत विभाजन के दौरान मारे गए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर डॉ. कृष्णानन्द पाण्डेय ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को हुआ भारत का विभाजन केवल देश का भौगोलिक बंटवारा नहीं था, बल्कि यह सम्पूर्ण भारत की आत्मा पर किया गया गहरा प्रहार था। विभाजन के दौरान जिस प्रकार लाखों निर्दोष भारतीयों की हत्या हुई, बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और परिवार बिछड़ गए, उसकी पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमारे इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे आने वाली पीढ़ियों को याद रखना चाहिए, ताकि समाज में आपसी भाईचारा, एकता और राष्ट्रीय भावना और मजबूत हो।

उन्होंने कहा कि आज का दिन उन सभी पुण्य आत्माओं को विनम्रता पूर्वक स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन की भयावह त्रासदी में अपने प्राण गंवाए। कैंडल मार्च के माध्यम से हम उन लाखों भारतवासियों के प्रति अपनी श्रद्धा और संवेदना व्यक्त कर रहे हैं, जिन्होंने विभाजन की कीमत अपने जीवन और अपनों से बिछड़कर चुकाई। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता को और मजबूत करना है।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी को विभाजन की विभीषिका से परिचित कराना जरूरी है। हमें उन परिस्थितियों को समझना होगा, जिनके कारण देश को इतनी बड़ी त्रासदी से गुजरना पड़ा। उन्होंने लोगों से राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कैंडल मार्च सुभाष पार्क से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। इस दौरान भारत माता की जय और राष्ट्रभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा। मार्च में कैप्टन विनोद उपाध्याय, सर्वाजीत मिश्रा, सियाराम पाठक, रोहित पाण्डेय, अभिषेक उपाध्याय समेत भूतपूर्व सैनिकों के साथ नगर के गणमान्य नागरिकों और अन्य लोगों ने सहभागिता की। अंत में सभी ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।