नई दिल्ली। देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस बार लाल किले पर होने वाला राष्ट्रीय समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक बनने जा रहा है। आजादी के उत्सव के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने की गौरवशाली विरासत को विशेष रूप से याद किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में पहली बार लाल किले के मुख्य समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का गायन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद देश को संबोधित करेंगे।
इस वर्ष राष्ट्रीय समारोह की भावना दो प्रमुख विषयों—‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ और ‘विकसित भारत@2047 के लिए युवा शक्ति’—पर केंद्रित है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों में राष्ट्रप्रेम और स्वाधीनता की चेतना जगाने वाला ‘वंदे मातरम्’ अब आजादी के 80वें पर्व पर लाल किले के राष्ट्रीय समारोह का विशेष हिस्सा बनेगा। यह आयोजन स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का भी संदेश देगा।
देश के इस सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से करीब पांच हजार विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले लोगों के साथ युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। समारोह में देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता की झलक भी दिखाई देगी।
15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के 79 वर्ष पूरे कर भारत आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। ऐसे समय में लाल किले से होने वाला आयोजन केवल आजादी का उत्सव नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए आने वाले भारत की दिशा तय करने का राष्ट्रीय संकल्प भी बनेगा। वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को इस बार समारोह के केंद्र में रखा गया है।
तिरंगे की आन-बान-शान, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा के बीच आज लाल किले से देश एक बार फिर स्वतंत्रता, एकता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प दोहराएगा। आजादी की विरासत से विकसित भारत के भविष्य तक का यही संदेश 80वें स्वतंत्रता दिवस को ऐतिहासिक और विशेष बनाएगा।
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