काशी में अध्यात्म जागरण और महिला सशक्तिकरण का अनूठा अभियान पूजा सिंह नीलू 


विकास के नाम पर पुरानी धरोहर का विनाश, काशीवासी चिंतित


वाराणसी। काशी की पावन धरती पर अध्यात्म को आमजन तक पहुंचाने और लोगों के हृदय में भक्ति की ज्योति जगाने का कार्य तेजी से प्रारंभ हो गया है। इस दिशा में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा स्रोत पूजा सिंह नीलू करणी सेना मीडिया प्रभारी ने सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्वयं एक महिला होते हुए उन्होंने महिलाओं को जागृत करने और उन्हें सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य सर्वोपरि स्तर पर किया। पूजा सिंह नीलू ने बाबा विश्वनाथ के उस दर्द को भी मुखरित किया, जिसके कारण काशीवासियों को बाबा से दूर रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि काशी में शिव और शक्ति दोनों का निवास है तथा दोनों स्वरूपों की पूजा-अर्चना यहां सदियों से होती आ रही है। 

काशी के विकास कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है। पूजा सिंह नीलू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास के नाम पर काशी की पुरानी धरोहरें खत्म होती जा रही हैं। गलियों का शहर काशी अब गलियों से वंचित हो रहा है। विकास की आड़ में गलियां समाप्त की जा रही हैं और काशी के मूल निवासी कैद महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसे शासनिक तंत्र की गुलामी करार देते हुए कहा कि काशी सनातन धर्म का केंद्र है और यहां की भूमिका सनातन जागरण में सर्वोपरि रही है।

मोक्ष की नगरी काशी में मणिकर्णिका घाट का नजारा विश्व भर में अनुपम है। यहां न सिर्फ देश के कोने-कोने से बल्कि विदेशों से भी लोग मोक्ष प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं। पूजा सिंह नीलू ने कहा कि काशी ऐसी अद्भुत नगरी है कि इसके बारे में जितना कहा जाए, उतना कम है। काशी न केवल आध्यात्मिक केंद्र है बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी प्रतीक है।

उनके अनुसार, काशी को आधुनिक बनाने के नाम पर उसकी मूल पहचान को मिटाने की बजाय संतुलित विकास की जरूरत है, जिसमें पुरानी गलियां, मंदिर और घाट संरक्षित रहें। पूजा सिंह नीलू का यह अभियान महिलाओं को सशक्त बनाते हुए पूरे काशी क्षेत्र में सनातन जागरण की लहर पैदा कर रही हैं। काशीवासी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और विकास व विरासत का सामंजस्यपूर्ण संतुलन बिठाया जाएगा।