आस्था का केंद्र बना व्यवसाय का अड्डा, परिक्रमा मार्ग के मंदिर का द्वार 3 फीट तक सिमटा
वाराणसी। काशी की पवित्र पंचकोशी परिक्रमा के चौथे पड़ाव शिवपुर स्थित ऐतिहासिक पांचों पांडव मंदिर पर अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम शनिवार को बिना कोई कार्रवाई किए लौट गई। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश के बावजूद टीम महंत रमेश तिवारी की दबंगई के आगे फेल हो गई। स्थानीय श्रद्धालुओं ने इसे महंत की दबंगई और प्रशासनिक नाकामी करार दिया है। मंदिर के मुख्य द्वार पर बनी दुकानों को हटाने के लिए लेखपाल और कानूनगो के साथ जेसीबी लेकर पहुंची टीम को महंत ने रोक दिया। महंत रमेश तिवारी ने पहले मकान के नाम से नगर निगम में पीला कार्ड (मकान संख्या 30/94) बनवाया था, जिसे बाद में रद्द कर मंदिर के नाम से नया कार्ड (30/95) जारी किया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
द्वापर युग से जुड़े इस प्राचीन मंदिर पर महंत का ही कब्जा बताते हुए स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि महंत ने परिक्रमा स्थल पर 4 दुकानें किराए पर दे रखी हैं और एक दुकान में खुद का रेस्टोरेंट चल रहा है। इससे 50 फीट लंबे परिक्रमा स्थल का प्रवेश द्वार मात्र 3 फीट रह गया है। पंचकोशी यात्रियों और रामेश्वर से आने वाले श्रद्धालुओं को दुकानों के बीच से संकरी गली से गुजरना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले महीने 22 जून 2026 को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने खुद स्थल का निरीक्षण किया था और तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ। श्रद्धालुओं ने कहा, आस्था की जगह अब व्यवसाय का केंद्र बन गई है। जब जेसीबी मौके पर थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई, प्रशासन किसके दबाव में कार्रवाई नहीं कर पाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महंत की दबंगई के कारण नगर निगम अधिकारी पीछे हट गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब नगर निगम की टीम के साथ लेखपाल और कानूनगो जेसीबी लेकर आए उसके पश्चात दबंग मंदिर के महंत ने कागजात के बहाने उनको अपने कमरे में ले गया वहां से वापस आने के बाद संबंधित अधिकारी वापस चले गए बंद कमरे में क्या हुआ इस संदेह का विषय है। पांच पांडव मंदिर काशी की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। अतिक्रमण हटाए जाने की मांग अब जोर पकड़ रही है। नगर निगम प्रशासन से जल्द ही प्रभावी कार्रवाई की अपील की जा रही है ताकि पवित्र परिक्रमा मार्ग को फिर से खुला और सुगम बनाया जा सके। निगम टीम पांच पांडव मंदिर पर अतिक्रमण हटाने में फेल, महंत रमेश तिवारी की दबंगई ने रोकी कार्रवाई
आस्था का केंद्र बना व्यवसाय का अड्डा, परिक्रमा मार्ग के मंदिर का द्वार 3 फीट तक सिमटा
वाराणसी। काशी की पवित्र पंचकोशी परिक्रमा के चौथे पड़ाव शिवपुर स्थित ऐतिहासिक पांचों पांडव मंदिर पर अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम शनिवार को बिना कोई कार्रवाई किए लौट गई। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश के बावजूद टीम महंत रमेश तिवारी की दबंगई के आगे फेल हो गई। स्थानीय श्रद्धालुओं ने इसे महंत की दबंगई और प्रशासनिक नाकामी करार दिया है। मंदिर के मुख्य द्वार पर बनी दुकानों को हटाने के लिए लेखपाल और कानूनगो के साथ जेसीबी लेकर पहुंची टीम को महंत ने रोक दिया। महंत रमेश तिवारी ने पहले मकान के नाम से नगर निगम में पीला कार्ड (मकान संख्या 30/94) बनवाया था, जिसे बाद में रद्द कर मंदिर के नाम से नया कार्ड (30/95) जारी किया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
द्वापर युग से जुड़े इस प्राचीन मंदिर पर महंत का ही कब्जा बताते हुए श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि महंत ने परिक्रमा स्थल पर 4 दुकानें किराए पर दे रखी हैं और एक दुकान में खुद का रेस्टोरेंट चल रहा है। इससे 50 फीट लंबे परिक्रमा स्थल का प्रवेश द्वार मात्र 3 फीट रह गया है। पंचकोशी यात्रियों और रामेश्वर से आने वाले श्रद्धालुओं को दुकानों के बीच से संकरी गली से गुजरना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले महीने 22 जून 2026 को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने खुद स्थल का निरीक्षण किया था और तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ। श्रद्धालुओं ने कहा, आस्था की जगह अब व्यवसाय का केंद्र बन गई है। जब जेसीबी मौके पर थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई, प्रशासन किसके दबाव में कार्रवाई नहीं कर पाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महंत की दबंगई के कारण नगर निगम अधिकारी पीछे हट गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब नगर निगम की टीम के साथ लेखपाल और कानूनगो जेसीबी लेकर आए उसके पश्चात दबंग मंदिर के महंत ने कागजात के बहाने उनको अपने कमरे में ले गया वहां से वापस आने के बाद संबंधित अधिकारी वापस चले गए बंद कमरे में क्या हुआ इस संदेह का विषय है। पांच पांडव मंदिर काशी की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। अतिक्रमण हटाए जाने की मांग अब जोर पकड़ रही है। नगर निगम प्रशासन से जल्द ही प्रभावी कार्रवाई की अपील की जा रही है ताकि पवित्र परिक्रमा मार्ग को फिर से खुला और सुगम बनाया जा सके।
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