वाराणसी। डॉक्टर्स डे के अवसर पर परफेक्ट मिशन से विशेष बातचीत में डॉ. अनुराग टंडन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, वाराणसी ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मानवता, करुणा और मरीजों के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में मनाया जाने वाला यह दिवस हमें याद दिलाता है कि डॉक्टर होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।

डॉ. टंडन ने कहा कि आज के डिजिटल युग में आंखों की देखभाल पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण ड्राई आई, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम, ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने से आंखों पर पड़ने वाला तनाव काफी कम होता है। साथ ही उन्होंने बताया कि मधुमेह के मरीजों को वर्ष में कम से कम एक बार रेटिना की जांच अवश्य करानी चाहिए, क्योंकि डायबिटिक रेटिनोपैथी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी दृष्टि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को कम उम्र में मोबाइल और टीवी की लत से बचाएं। यदि बच्चा बार-बार आंखें मलता है, टीवी के बहुत पास बैठता है या सिरदर्द की शिकायत करता है, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उपचार से अंधेपन के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।

युवा नेत्र चिकित्सकों के लिए डॉ. अनुराग टंडन ने कहा कि एक सफल सर्जन बनने के लिए तकनीकी दक्षता के साथ संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। मरीज की फाइल देखने से पहले उसकी आंखों में छिपी उम्मीद और डर को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोतियाबिंद की सर्जरी केवल दृष्टि लौटाने का माध्यम नहीं, बल्कि कई बुजुर्गों के लिए आत्मनिर्भर जीवन वापस देने का अवसर भी होती है। उन्होंने युवा डॉक्टरों को अपनी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन का भी ध्यान रखने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ चिकित्सक ही बेहतर उपचार दे सकता है।

समाज से अपील करते हुए डॉ. अनुराग टंडन ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में धैर्य रखें, क्योंकि संभव है डॉक्टर किसी अन्य मरीज की आंखों की रोशनी बचाने में व्यस्त हों। उन्होंने कहा कि उपचार के बाद मरीज की एक सच्ची मुस्कान और "धन्यवाद, डॉक्टर" जैसे दो शब्द किसी भी चिकित्सक के लिए सबसे बड़ा सम्मान होते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग हमें दुनिया को देखने की रोशनी देते हैं, उनके सम्मान, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करना पूरे समाज का दायित्व है।