वाराणसी। लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार को एक तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग की घटना के बाद पूरे प्रदेश में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जान बचाने के लिए कई लोगों को इमारत से कूदना पड़ा, जबकि कुछ लोग पाइप के सहारे नीचे उतरकर बाहर निकले। कोचिंग सेंटर में हुई इस दर्दनाक घटना में 15 छात्रों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध रूप से संचालित शिक्षण संस्थानों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वाराणसी में संचालित आकाश इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग की जांच के बाद उसे सीज कर दिया गया। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आकाश इंस्टीट्यूट के वाराणसी शाखा संचालक विष्णु देवा ने कहा कि सरकार लखनऊ अग्निकांड के बाद अपनी नाकामी छिपाने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि जिस भवन में संस्थान संचालित हो रहा था, वह वर्ष 1975 का बना हुआ है और उस समय विकास प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं था, इसलिए भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया था। विष्णु देवा ने दावा किया कि भवन के पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मौजूद है, इसके बावजूद विकास प्राधिकरण ने भवन को पुराना बताते हुए सीज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुराने भवनों को आधार बनाकर कार्रवाई की जा रही है, तो वाराणसी में मौजूद अन्य पुराने भवनों पर समान कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीज करने से पहले न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई सूचना उपलब्ध कराई गई। बिना पक्ष सुने और मौका दिए सीधे भवन सीज कर दिया गया। आगे की रणनीति के संबंध में उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बाद वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे, क्योंकि यह केवल संस्थान का नहीं बल्कि वहां अध्ययनरत बच्चों के भविष्य का भी सवाल है।