वाराणसी। ब्रेथ ईजी चेस्ट फाउंडेशन फॉर ह्यूमैनिटी, ब्रेथ ईजी टी.बी., चेस्ट एवं एलर्जी केयर अस्पताल (अस्सी), इंडियन चेस्ट सोसाइटी तथा आईएमए वाराणसी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल से प्रमाणित रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव एवं चिकित्सकीय कार्यशाला का आयोजन रविवार को वाराणसी में हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के 300 से अधिक प्रख्यात चिकित्सकों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 10 हजार से अधिक चिकित्सक एवं प्रतिभागी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उद्घाटन पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आईएमएस-बीएचयू के निदेशक डॉ. एस.एन. संखवार, डीन डॉ. संजय गुप्ता, वाराणसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. जे.सी. सूरी, डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. राजाधर, डॉ. एस.के. पाठक, डॉ. आशीष टंडन, डॉ. आलोक नाथ तथा डॉ. सुनीता पाठक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर ब्रेथ ईजी की वार्षिक पत्रिका "बी.ई. टाइम्स" का भी विमोचन किया गया। सभी प्रतिभागी चिकित्सकों को उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की ओर से तीन मेडिकल अकादमिक क्रेडिट अंक प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सम्मेलन चिकित्सकों को नवीनतम शोध, आधुनिक उपचार पद्धतियों तथा अनुभवों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने इसे ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताते हुए आयोजन समिति और डॉ. एस.के. पाठक की टीम को बधाई दी। सम्मेलन के आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ श्वांस एवं टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. पाठक ने बताया कि ब्रेथ ईजी के प्रयास से भारत में तेरहवीं बार इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों को गंभीर श्वांस रोगों के उपचार की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना है, जिससे मरीजों को कम समय और कम खर्च में बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
सम्मेलन में जेसीएस इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. जे.सी. सूरी ने स्लीप एप्निया के आधुनिक उपचार, स्मार्ट सीपैप तकनीक, नई दवाओं और जीवनशैली आधारित कॉम्बिनेशन थेरेपी पर जानकारी दी। केजीएमसी लखनऊ के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने कठिन अस्थमा के प्रभावी प्रबंधन तथा पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन पर कार्यशाला का संचालन किया। सीएमआरआई कोलकाता के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजाधर ने टीबी के बाद फेफड़ों में होने वाली जटिलताओं, जबकि प्रयागराज के डॉ. आशीष टंडन ने श्वांस रोगों के निदान एवं उपचार में रेडियोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉ. आलोक नाथ ने गर्भावस्था के दौरान अस्थमा के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक उपचार पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अनियंत्रित अस्थमा दवाओं की अपेक्षा मां और शिशु दोनों के लिए अधिक जोखिम पैदा करता है।
समापन सत्र में पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने चेस्ट मेडिसिन से जुड़े महत्वपूर्ण क्लीनिकल मामलों पर चिकित्सकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि समय पर सही उपचार से गंभीर रोगियों का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने पूर्वांचल के चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा से जोड़ने में ब्रेथ ईजी और डॉ. एस.के. पाठक के योगदान की सराहना की तथा इसे चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। अंत में डॉ. एस.के. पाठक ने सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया तथा प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े चिकित्सकों, मीडिया प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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