वाराणसी। डॉक्टर्स डे के अवसर पर परफेक्ट मिशन से विशेष बातचीत में डॉ. आशुतोष मिश्रा, पैनेसिया मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं डायबिटीज केयर, वाराणसी ने कहा कि भारत की चिकित्सा परंपरा केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि करुणा, ज्ञान, सेवा और मानवता की अखंड साधना का प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि महर्षि सुश्रुत, आचार्य चरक और वाग्भट ने चिकित्सा को विज्ञान, दर्शन और नैतिकता से जोड़ा तथा मानव शरीर को केवल अंगों का समूह नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलित समन्वय के रूप में देखा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि महर्षि सुश्रुत को विश्व शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है और आज भी उनके योगदान का सम्मान विश्वभर में किया जाता है। वहीं आचार्य चरक ने स्पष्ट किया कि असंतुलित जीवनशैली, अनुचित आहार, मानसिक तनाव और प्रकृति से दूरी अनेक बीमारियों की प्रमुख वजह हैं। उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि संतुलित आहार, संतुलित विहार और संतुलित विचार ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय एवं किडनी रोग जैसी जीवनशैली आधारित बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धियों के साथ भारतीय चिकित्सा की रोग-निवारक सोच को अपनाना बेहद आवश्यक है। आईसीयू, स्टेंट, डायलिसिस और प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक तकनीकों ने लाखों लोगों का जीवन बचाया है, लेकिन रोग होने से पहले उसे रोकना चिकित्सा का सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।
डॉ. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि चिकित्सक सीमित संसाधनों और अत्यधिक कार्यभार के बावजूद दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। महामारी हो या अन्य कोई संकट, डॉक्टर हर परिस्थिति में समाज के लिए समर्पित रहते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण भी समाज की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक प्रमाण-आधारित चिकित्सा और भारतीय चिकित्सा परंपरा की निवारक जीवनशैली का समन्वय किया जाए तो मधुमेह, हृदय और किडनी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह दिन महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति को नमन करने का अवसर है। साथ ही यह महर्षि सुश्रुत, आचार्य चरक और वर्तमान समय के सभी समर्पित चिकित्सकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि जब तक सेवा, संवेदना और विज्ञान की यह परंपरा जीवित रहेगी, तब तक भारत आरोग्य और चिकित्सा के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करता रहेगा।
Comments (0)