वाराणसी। डॉक्टर्स डे के अवसर पर परफेक्ट मिशन से विशेष बातचीत में डॉ. विकास जायसवाल, सर्वश्रेष्ठ पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ, आरआईएमएस (रिम्स) हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, वाराणसी ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस केवल डॉक्टरों के सम्मान का उत्सव नहीं, बल्कि उन हाथों और उस संवेदनशील हृदय को नमन करने का अवसर है जो दिन-रात मरीजों की सेवा में समर्पित रहते हैं। उन्होंने कहा कि महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में मनाया जाने वाला यह दिवस हमें याद दिलाता है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम है।

डॉ. जायसवाल ने कहा कि एक पल्मोनोलॉजिस्ट के रूप में वे प्रतिदिन महसूस करते हैं कि स्वस्थ सांस लेना जीवन का सबसे बड़ा उपहार है। आज हृदय, मधुमेह और किडनी रोगों के साथ-साथ सीओपीडी, अस्थमा, तपेदिक और फेफड़ों का कैंसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों से पूरी तरह दूरी बनाने, धूल और प्रदूषण से बचाव के लिए आवश्यकतानुसार मास्क का उपयोग करने तथा सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने जैसी समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेने पर गंभीर फेफड़ों की बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

युवा चिकित्सकों के लिए डॉ. जायसवाल ने कहा कि एक अच्छा डॉक्टर बनने के लिए केवल चिकित्सा ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज की बात धैर्यपूर्वक सुनना, उसके दर्द और भय को समझना तथा करुणा के साथ उपचार करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रोगी के इतिहास में ही अधिकांश निदान छिपा होता है और आईसीयू में डॉक्टर केवल वेंटिलेटर ही नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिजनों को उम्मीद भी देता है। साथ ही उन्होंने युवा डॉक्टरों को अपनी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन का भी ध्यान रखने की सलाह दी।

समाज से अपील करते हुए डॉ. विकास जायसवाल ने कहा कि यदि किसी आपात स्थिति में डॉक्टर के पहुंचने में कुछ देर हो जाए तो धैर्य रखें, क्योंकि संभव है वह किसी अन्य मरीज का जीवन बचाने में जुटा हो। उन्होंने कहा कि उपचार के बाद डॉक्टर को एक सच्चा "धन्यवाद" कहना भी उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों की जान बचाने का दायित्व निभाते हैं, उनके जीवन, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।