नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने सत्ता से बेदखल किए जाने के लगभग दो वर्ष बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी राजनीतिक वापसी का संकेत दिया है। नई दिल्ली से आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहे उन्हें जेल जाना पड़े या जान का खतरा उठाना पड़े, लेकिन वह हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी। अपने संबोधन में हसीना ने कहा कि उन्हें देश छोडऩे के लिए मजबूर किया गया, लेकिन वह कभी भी अपने लोगों से दूर नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में सुरक्षा, लोकतंत्र, विकास और शांति की बहाली है। उन्होंने संकेत दिया कि वह इसी वर्ष दिसंबर में देश लौट सकती हैं।

2024 के आंदोलन पर उठाए सवाल

शेख हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को लेकर भी कई सवाल उठाए। उनका दावा था कि यह केवल छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था, बल्कि उनकी सरकार को हटाने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की आड़ में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हिंसा की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित किया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अंतरिम सरकार ने उस जांच को आगे नहीं बढऩे दिया।

यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व प्रधानमंत्री ने अंतरिम सरकार पर कानून व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि हिंसा में शामिल लोगों को कानूनी संरक्षण दिया गया, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यकों, पत्रकारों, न्यायाधीशों, सांस्कृतिक हस्तियों और आम नागरिकों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर बेटे सजीब वाजेद ने उठाए सवाल

कार्यक्रम में शेख हसीना के बेटे और पूर्व आईसीटी सलाहकार सजीब वाजेद ने भी 2024 के आंदोलन में हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 1,400 मौतों का उल्लेख किया है, जबकि सरकारी आंकड़ा करीब 800 का है। उन्होंने पूछा कि शेष लोगों की सूची अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। वाजेद ने यह भी आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार ने ऐसा कानून बनाया है, जिससे आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई करना कठिन हो गया है।

अर्थव्यवस्था को लेकर भी साधा निशाना

शेख हसीना ने दावा किया कि उनके सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। उनके अनुसार आर्थिक विकास दर में गिरावट आई है, उद्योग प्रभावित हुए हैं, निवेश घटा है, बैंकों में डिफॉल्ट बढ़े हैं और गरीबी में इजाफा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खर्च चलाने के लिए लगातार केंद्रीय बैंक से उधार लेने को मजबूर है। अवामी लीग के नेता मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल ने कहा कि सरकार बदले दो वर्ष पूरे होने के बावजूद देश राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के कमजोर होने का आरोप लगाते हुए समान अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की मांग की।

भारत का जताया आभार

सजीब वाजेद ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि बांग्लादेश छोडऩे के बाद भारत ने शेख हसीना को सम्मान, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं। उन्होंने इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों की सकारात्मक मिसाल बताया। अपने संबोधन की शुरुआत में शेख हसीना भावुक दिखाई दीं। उन्होंने 1975 में अपने परिवार की हत्या और 1971 के मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश की जनता और देश के भविष्य के लिए है।