चंदौली जनपद में विंध्य एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में भूमि बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले शुक्रवार को दूसरे दिन भी किसानों ने पदयात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। समिति के संरक्षक सुमंत सिंह अन्ना, अशोक सिंह तथा अध्यक्ष महेश्वर सिंह के नेतृत्व में निकली पदयात्रा में सैकड़ों किसानों ने "विंध्य एक्सप्रेस-वे वापस लो" के नारे लगाते हुए परियोजना को निरस्त करने की मांग की।
बरहनी क्षेत्र के रामपुर गांव से शुरू हुई पदयात्रा महुजी, बरहनी, परसिया, चारी, चिरईगांव, बरठी और कमरौर सहित विभिन्न गांवों से होते हुए परेवा स्थित मां दुर्गा मंदिर पहुंची, जहां किसानों की सभा आयोजित की गई। सभा में किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी कृषि भूमि अधिग्रहण के लिए नहीं देंगे और सरकार को विंध्य एक्सप्रेस-वे की योजना वापस लेनी होगी।
किसानों का कहना था कि प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बरहनी ब्लॉक के 18 गांवों की बड़ी आबादी प्रभावित होगी। उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित होने से अनेक किसान भूमिहीन हो जाएंगे और उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने आरोप लगाया कि इस परियोजना से उन्हें कोई लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि विंध्य एक्सप्रेस-वे के बजाय सैयदराजा-जमानिया मार्ग को छह लेन में विकसित किया जाए। उनका तर्क था कि यह मार्ग पहले से मौजूद है, इसलिए इसके चौड़ीकरण से कम भूमि अधिग्रहण होगा और किसानों को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। साथ ही इसे आगे गाजीपुर तक जोड़ने की मांग भी उठाई गई।
किसानों ने यह आशंका भी जताई कि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद कर्मनाशा नदी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने पर तटवर्ती गांवों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ सकता है। सभा में सरकार से परियोजना पर पुनर्विचार कर किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की गई। इस दौरान सुमंत सिंह अन्ना, अशोक सिंह, महेश्वर सिंह, निखिल सिंह, ज्ञान प्रकाश सिंह, मुन्ना सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, अरुण सिंह, समरेंद्र सिंह, जयशंकर सिंह, रविशंकर सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
Comments (0)