कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर छात्रों के आंदोलन को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के साथ सरकार राष्ट्र के दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है।

शुक्रवार को प्रकाशित एक लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों ने परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग उठाई है, लेकिन सरकार ने उनके साहस का जवाब कायरता और अनावश्यक कठोरता से दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का प्रयास कर रही है।

सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक दायित्व है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अव्यवस्था और सरकार द्वारा जवाबदेही तय करने से लगातार इनकार के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है और छात्रों के आंदोलन ने शिक्षा प्रणाली की कमियों तथा सरकारी दावों की वास्तविकता को उजागर कर दिया है।

'प्रदर्शनकारियों के साथ पहले भी बर्बरता करती रही है सरकार': सोनिया गांधी

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के प्रत्यक्ष अधिकार क्षेत्र में काम करने वाली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ की गई कथित बर्बरता इस सरकार के कार्यकाल में पहले भी देखने को मिल चुकी है।

सोनिया गांधी ने कहा कि वर्ष 2020 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कार्रवाई को देश ने देखा था। उन्होंने यह भी कहा कि महिला पहलवानों के आंदोलन के दौरान हुई कथित ज्यादतियों को भी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार शांतिपूर्ण आंदोलनों पर कठोर रवैया अपनाती रही है, जबकि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की आवाज़ को सम्मान मिलना चाहिए। सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों और युवाओं की मांगों को दबाने के बजाय सरकार को उनकी बात सुनकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।