नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर संसद में विस्तृत जानकारी सामने आई है। राज्यसभा में विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि वर्ष 2021 के बाद प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर होने वाला वार्षिक खर्च लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021 में जहां यह खर्च लगभग 36 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025 में बढ़कर 180 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं, वर्ष 2026 में जून तक ही 74.58 करोड़ रुपये से अधिक खर्च दर्ज किया जा चुका है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि कुछ यात्राओं का अंतिम व्यय अभी जोड़ा जाना बाकी है।
2021 से 2026 तक कितना हुआ कुल खर्च?
विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि 2021 से 2025 के बीच प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर 550 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए। वहीं 2026 में अब तक 74.58 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस प्रकार 2021 से अब तक कुल खर्च 625 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। हालांकि इसमें जून 2026 की फ्रांस यात्रा सहित कुछ दौरों का अंतिम लेखा-जोखा शामिल नहीं है।
सालवार खर्च का पूरा ब्यौरा
विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर वर्षवार खर्च इस प्रकार रहा—
- 2021: 36 करोड़ रुपये से अधिक
- 2022: 55 करोड़ रुपये
- 2023: 93 करोड़ रुपये
- 2024: 109 करोड़ रुपये
- 2025: 180 करोड़ रुपये से अधिक
- 2026 (अब तक): 74.58 करोड़ रुपये से अधिक
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ विदेश यात्राओं का खर्च भी लगातार बढ़ा है।
2026 में किस यात्रा पर सबसे अधिक खर्च?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक दर्ज खर्च में मई महीने के पांच देशों के दौरे के दौरान नॉर्वे यात्रा सबसे महंगी रही। इस दौरे पर लगभग 17.46 करोड़ रुपये खर्च हुए। मंत्रालय के अनुसार कुछ अन्य यात्राओं के अंतिम व्यय का आकलन अभी शेष है।
सरकार ने खर्च का दिया यह तर्क
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को केवल खर्च के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक जुलाई 2021 से अब तक 316 समझौता ज्ञापन (MoU) और विभिन्न द्विपक्षीय समझौते हुए हैं।
इन समझौतों में कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं—
- रक्षा सहयोग
- डिजिटल टेक्नोलॉजी
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- सेमीकंडक्टर
- नवीकरणीय ऊर्जा
- स्वास्थ्य सेवाएं
- शिक्षा
- कृषि
- अंतरिक्ष सहयोग
- मोबिलिटी एवं माइग्रेशन
- जलवायु परिवर्तन
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान
सरकार का कहना है कि इन समझौतों का दीर्घकालिक लाभ भारत की अर्थव्यवस्था, निवेश, तकनीक और वैश्विक साझेदारी को मिलेगा।
FDI के आंकड़े भी किए गए पेश
विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया। सरकार का कहना है कि वैश्विक निवेशकों के साथ बढ़ते संपर्क और उच्चस्तरीय कूटनीतिक यात्राओं ने भारत में निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संसद में उठता रहा है खर्च का मुद्दा
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च को लेकर समय-समय पर संसद में सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष अक्सर इन दौरों की लागत और उपयोगिता पर प्रश्न करता रहा है, जबकि सरकार का तर्क है कि इन यात्राओं से भारत की वैश्विक साख मजबूत हुई है, निवेश बढ़ा है और रणनीतिक साझेदारियां विकसित हुई हैं।
अब संसद में प्रस्तुत ताजा आंकड़ों के बाद विदेश यात्राओं के खर्च और उनसे होने वाले आर्थिक एवं कूटनीतिक लाभ को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।
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