मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को युवा पीढ़ी को लेकर बड़ा बयान दिया। मुंबई में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में जेन-जी (Gen Z) और जेन-अल्फा (Gen Alpha) के युवाओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पर उन्हें पूरा भरोसा है। भागवत ने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा हमारी वर्तमान पीढ़ी से अधिक ईमानदार और देशभक्त हैं, इसलिए समाज और देश के भविष्य को लेकर निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
नई पीढ़ी पर जताया भरोसा
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, समाज और राष्ट्र के प्रति गंभीर नहीं है, लेकिन उनका अनुभव इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि आज के युवा ईमानदारी से सोचते हैं, सवाल पूछते हैं और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिले तो वे भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नई पीढ़ी को केवल आलोचना की नजर से देखने के बजाय उनकी सोच और ऊर्जा को समझने की जरूरत है।
छात्र आंदोलनों पर भी रखी राय
हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में हुए छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन में शामिल युवाओं को तुरंत 'राष्ट्र-विरोधी' कहना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "अगर जेन-जी विरोध कर रहा है, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं। वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं।" भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को सुनना जरूरी है। यदि वे किसी मुद्दे पर विरोध दर्ज करा रहे हैं तो उसके पीछे के कारणों को समझना चाहिए।
बल प्रयोग के कारणों की हो समीक्षा
आरएसएस प्रमुख ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान होने वाले बल प्रयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का निष्पक्ष अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों उत्पन्न होती हैं। उनका मानना है कि संवाद और समझदारी से कई विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।
भारत की युवा शक्ति पर विश्वास
मोहन भागवत ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और आने वाले वर्षों में यही युवा देश की सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे। उन्होंने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा तकनीक के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को भी गंभीरता से समझ रहे हैं। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया और कहा कि भारत का भविष्य नई पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है।
देशभर में चर्चा का विषय बना बयान
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में युवाओं की भूमिका, छात्र आंदोलनों और लोकतांत्रिक संवाद को लेकर लगातार बहस चल रही है। ऐसे माहौल में आरएसएस प्रमुख का नई पीढ़ी के समर्थन में दिया गया बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि उनका यह संदेश युवाओं के प्रति विश्वास और संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
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