चंदौली। केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल एवं शुद्ध पेयजल योजना जनपद में सवालों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कहीं पानी में दुर्गंध की शिकायत है तो कहीं जलापूर्ति परियोजना वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी है। लगातार शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार आवाजापुर की पानी टंकी से होने वाली जलापूर्ति में लंबे समय से दुर्गंध और अशुद्धता की समस्या बनी हुई है।

मजबूरी में लोग उसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों में कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो पानी की गुणवत्ता की सार्वजनिक जांच कराई गई और न ही समस्या का स्थायी समाधान किया गया। उधर, डेढ़वालिया की पानी टंकी का निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। अधूरी परियोजना के कारण ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा, जबकि इस पर सरकारी धन खर्च किया जा चुका है। इससे लोगों में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनपद की सभी पानी टंकियों से पानी के नमूने लेकर किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से गुणवत्ता की जांच कराई जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोगों तक पहुंच रहा पानी वास्तव में पीने योग्य है या नहीं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो जल गुणवत्ता की नियमित जांच और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती। साथ ही उन्होंने पूछा कि आवाजापुर के पानी की जांच कब होगी, डेढ़वालिया की अधूरी परियोजना कब पूरी होगी और शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग जवाबदेही से क्यों बच रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जनपद की सभी पेयजल योजनाओं की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच कराई जाए, अधूरे निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए तथा जहां भी लापरवाही या अनियमितता मिले, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध सख्त कार्यवाई की जाए।