प्रयागराज। प्रयागराज में निर्माणाधीन डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों का शुक्रवार को मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर 500 से 800 अतिरिक्त श्रमिकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही चेतावनी दी कि अगली समीक्षा बैठक में संतोषजनक प्रगति नहीं मिलने पर निर्माण कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) को तलब किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवनों के डिजाइन, ड्रॉइंग और निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने सिविल कार्य, प्लास्टरिंग, टाइल्स, फॉल्स सीलिंग, लिफ्ट स्थापना सहित सभी निर्माण गतिविधियों की क्रमवार समीक्षा करते हुए प्रत्येक कार्य का गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मंडलायुक्त ने सभी निर्माण कार्य 15 नवंबर तक हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का शुभारंभ निर्धारित समयसीमा के अनुसार कराया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति एवं कुलसचिव के साथ समन्वय स्थापित कर फर्नीचर, कक्षाओं, छात्रावासों और अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए तत्काल क्रय आदेश जारी करने को कहा, ताकि भवन तैयार होते ही विश्वविद्यालय पूरी तरह क्रियाशील हो सके और शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी विलंब के शुरू की जा सकें।
उन्होंने परिसर में साउंड सिस्टम, वाई-फाई, फायर एनओसी, अग्निशमन जलाशय, एसटीपी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सभी आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुविधाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। खेल सुविधाओं के विकास में विशेषज्ञों की सलाह लेने, बैडमिंटन कोर्ट की वुडन फ्लोरिंग मानक कंपनी से कराने, ओपन एयर थिएटर में कैनोपी लगाने, भवनों पर हीट रिफ्लेक्टिव एवं वाटर रेजिस्टेंट पेंट कराने तथा मुख्य प्रवेश द्वार, फ्रंट फसाड और हरित क्षेत्र के विकास पर भी विशेष जोर दिया।
निरीक्षण के बाद मंडलायुक्त ने तहसील मेजा के विकास खंड मांडा अंतर्गत ग्राम डेंगूरपुर में गंगा नदी के दाएं तट पर चल रहे बाढ़ एवं कटानरोधी सुरक्षा कार्यों का भी जायजा लिया। लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से 222 मीटर लंबाई में किए जा रहे तट संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को तकनीकी मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए।
इस दौरान मंडलायुक्त ने ग्राम प्रधान एवं स्थानीय ग्रामीणों से संवाद कर परियोजना से संबंधित फीडबैक भी लिया और जनहित से जुड़े सुझावों एवं समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि जनता को योजनाओं का पूरा लाभ समय पर मिल सके।
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