वाराणसी। भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी एक बार फिर शिक्षा क्षेत्र की ऐतिहासिक पहल की साक्षी बनी, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो दिवसीय वाराणसी प्रवास के दौरान बड़ालालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का एक साथ शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ, 1.10 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में 1320 करोड़ रुपये की डीबीटी राशि का अंतरण, बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू का आदान-प्रदान तथा राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह आयोजन केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित, सशक्त और आधुनिक बनाने की व्यापक सोच का परिचायक बना।


"बच्चों की मजबूत नींव ही विकसित भारत का आधार"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि काशी की पावन धरती से शुरू हुई यह पहल पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र तभी मजबूत बनता है जब उसकी शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो। यदि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा सुदृढ़ होगी तो वही आगे चलकर विकसित भारत की नींव बनेगी। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि बच्चे अबोध होते हैं, उन्हें सही दिशा देना केवल एक पेशा नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निपुण भारत अभियान ने प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है और अब प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता के अनुरूप दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यालयों को स्वच्छ, अनुशासित और प्रेरणादायी वातावरण वाला बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा में किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता।



12 लाख शिक्षकों और कर्मचारियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना रही। इस योजना के अंतर्गत बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (सीडब्ल्यूएसएन), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डेन, शिक्षिकाएं, प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइये तथा उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।

प्रदेश सरकार इस योजना के लिए प्रति शिक्षक लगभग 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम का भुगतान स्वयं करेगी। लगभग 447 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय सरकार वहन करेगी और करीब 12 लाख शिक्षक एवं कर्मचारी परिवार इस योजना से लाभान्वित होंगे। योजना के अंतर्गत सरकारी एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में लगभग 1900 उपचार पैकेजों के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, जटिल सर्जरी सहित गंभीर बीमारियों का कैशलेस उपचार संभव होगा। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से 15 शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी वितरित किए।

डीबीटी से सीधे पहुंचे 1320 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 1 करोड़ 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 1320 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। यह राशि स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते-मोजे तथा स्टेशनरी जैसी आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए भेजी गई।

सरकार द्वारा प्रति छात्र 1200 रुपये की सहायता सीधे अभिभावकों के खाते में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और विद्यार्थियों को समय पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में सुविधा मिली है।



शिक्षकों को मिलेगा करोड़ों रुपये तक का बीमा सुरक्षा कवच

कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग एवं भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ। इसके तहत लगभग 10 लाख शिक्षकों एवं कार्मिकों को व्यापक बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

स्थायी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, एक करोड़ रुपये का पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एक करोड़ रुपये का स्थायी विकलांगता कवर तथा 1.60 करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंट कवर मिलेगा। इसके अतिरिक्त किसी अप्रिय घटना की स्थिति में उनके बच्चों की शिक्षा एवं पुत्रियों के विवाह के लिए भी विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। संविदा कर्मचारियों और कम वेतन वाले कार्मिकों के लिए भी अलग-अलग श्रेणियों में बीमा एवं सुरक्षा सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।

स्वच्छ और हरित विद्यालयों को राष्ट्रीय सम्मान

कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार की स्वच्छ एवं हरित विद्यालय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया गया। विद्यालयों में स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई, पर्यावरण संरक्षण और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली इस योजना को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चेतना का भी महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है।

"नकल मुक्त शिक्षा और नई शिक्षा नीति से बदलेगा भविष्य"

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज नकल मुक्त परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के कारण देश में नई पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी में पहुंचा दिया था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश को विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, आधुनिक विद्यालय, प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से मजबूत आधारभूत ढांचा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदेश के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मंत्रियों ने बताया शिक्षा सुधार का नया अध्याय

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री की "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" की सोच को साकार करता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के अनेक निर्णय आज अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन रहे हैं। वहीं माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग के मंत्रियों ने भी शिक्षकों, अनुदेशकों और शिक्षा कर्मियों को नई योजनाओं के लिए बधाई देते हुए इन्हें शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत बताया।

प्रदेशभर के शिक्षा परिवार को मिला विश्वास का संदेश

समारोह में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लोक निर्माण राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम, अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार, भारतीय स्टेट बैंक के सीजीएम दीपेश राय सहित शिक्षा विभाग एवं प्रशासन के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार शिक्षा को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जहां प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे, प्रत्येक शिक्षक सम्मान और सुरक्षा के साथ कार्य करे तथा उत्तर प्रदेश देश की सबसे मजबूत शैक्षिक व्यवस्था वाला राज्य बने।