वाराणसी। जय श्री कृष्णा फाउंडेशन (जेएसके) के 16वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय भव्य ‘पंचामृत उत्सव-2026’ का रविवार को आस्था, सेवा, संस्कृति और सामाजिक समर्पण के अद्भुत संगम के साथ भव्य समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव ने धार्मिक आस्था, पारिवारिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का ऐसा वातावरण बनाया, जिसने हजारों लोगों के मन को श्रद्धा और उत्साह से भर दिया। उत्सव के अंतिम दिन सुबह से लेकर देर शाम तक आयोजित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

रविवार की शुरुआत काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुई। प्रातःकाल काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में जेएसके परिवार के 201 दंपतियों ने एक साथ भगवान शिव का सामूहिक रुद्राभिषेक किया। वैदिक ऋचाओं, मंत्रोच्चार और "हर-हर महादेव" के गगनभेदी जयघोष के बीच संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का विधि-विधान से पूजन कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति तथा कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा और सामूहिक आस्था का अनूठा अनुभव बन गया।

उत्सव का भव्य समापन रविवार शाम बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह के साथ हुआ। शाम छह बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री और उनके पति हिमालय दसानी ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह में उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रेरक संदेशों और उत्साहपूर्ण वातावरण ने उपस्थित लोगों को देर तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा।

समापन समारोह का साक्षी बनने के लिए वाराणसी के लगभग एक हजार से अधिक परिवार स्वतंत्रता भवन पहुंचे। पूरे सभागार में उत्साह, अनुशासन और पारिवारिक सहभागिता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रमों का आनंद लिया और जेएसके परिवार की एकजुटता का परिचय दिया।

इस अवसर पर जेएसके के संस्थापक संजीव अग्रवाल तथा राजीव गुप्ता (एजीआर) सहित संस्था के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं गणमान्य लोग मंच पर उपस्थित रहे। उन्होंने फाउंडेशन की 16 वर्षों की सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा, पारिवारिक एकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने सभी सहयोगियों, स्वयंसेवकों और सहभागी परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी समाजहित के ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

तीन दिवसीय ‘पंचामृत उत्सव-2026’ का यह भव्य समापन केवल एक आयोजन का अंत नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का ऐसा संदेश बनकर सामने आया, जिसने यह साबित किया कि जब सेवा, संस्कार और श्रद्धा एक साथ जुड़ते हैं तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का नया वातावरण तैयार होता है। पूरे आयोजन ने वाराणसी की आध्यात्मिक परंपरा और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।